यह कहानी एक छोटे लड़के यूसुफ की है, जिसकी अडिग आस्था और निस्वार्थ दयालुता ने एक सूखे गाँव की किस्मत बदल दी। जब यूसुफ ने अपनी प्यास की परवाह किए बिना एक अजनबी की मदद की, तो उसे अल्लाह की तरफ से वह इनाम मिला जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी। यह एक प्रेरणादायक कहानी है जो बच्चों को भरोसा, मेहनत और दूसरों की मदद करने का महत्व सिखाती है।
مطالبة التوليد(سجّل الدخول لرؤية المطالبة الكاملة)
अल्लाह पर भरोसा करने वाला लड़का बहुत समय पहले, एक छोटे से गाँव में यूसुफ नाम का एक लड़का रहता था। यूसुफ बहुत नेक, ईमानदार और दयालु था। उसे नबियों की कहानियाँ सुनना बहुत पसंद था। एक साल गाँव में भयंकर सूखा पड़ गया। कुएँ सूख गए, खेत बंजर हो गए और लोग परेशान हो गए। यूसुफ के पिता ने कहा, “हमें मेहनत भी करनी चाहिए और अल्लाह से दुआ भी करनी चाहिए। वही सबसे अच्छा रिज़्क़ देने वाला है।” हर दिन यूसुफ दूर के चश्मे से पानी लाने में अपने पिता की मदद करता था। एक दिन वापस लौटते समय उसने एक बूढ़े मुसाफ़िर को पेड़ के नीचे बैठे देखा। वह बहुत थका हुआ और प्यासा था। यूसुफ के पास सिर्फ़ एक छोटी सी पानी की मशक बची थी। वह खुद भी बहुत प्यासा था। कुछ पल के लिए वह सोच में पड़ गया। फिर उसे याद आया कि जो भलाई अल्लाह के लिए की जाती है, उसका बदला अल्लाह ज़रूर देता है। यूसुफ ने मुस्कुराकर अपना पानी उस मुसाफ़िर को दे दिया। बूढ़े मुसाफ़िर ने दुआ दी, “अल्लाह तुम्हें तुम्हारे भरोसे का बेहतरीन बदला दे।” यूसुफ थका हुआ घर पहुँचा, लेकिन उसके दिल में सुकून था। तभी आसमान में काले बादल छा गए। थोड़ी ही देर में तेज़ बारिश शुरू हो गई। गाँव के लोग खुशी से चिल्लाने लगे, “अल्हम्दुलिल्लाह!” सूखी धरती ने पानी पी लिया, खेत फिर से हरे-भरे हो गए। अगले दिन वही मुसाफ़िर फिर मिला। उसने कहा, “अल्लाह उन लोगों की नेकी कभी नहीं भूलता जो उस पर भरोसा करते हैं।” यूसुफ ने समझ लिया कि जब इंसान अल्लाह की राह में दूसरों की मदद करता है, तो अल्लाह उसे ऐसी बरकत देता है जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकता। कहानी से सीख मुश्किल समय में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। कम होने पर भी दूसरों की मदद करनी चाहिए। मेहनत और दुआ दोनों ज़रूरी हैं। अल्लाह नेक कामों का बेहतरीन बदला देता है।