Bungalow Number 17 - Mistero e detective

Bungalow Number 17

Geschichtenbeschreibung

Three inseparable childhood friends venture into the bustling city of Mumbai with big dreams, only to find themselves stranded without a job or a home. When a kind watchman offers them shelter in an eerie, vacant mansion, they think their luck has changed. But as midnight strikes, the shadows of Bungalow Number 17 begin to whisper a terrifying secret that will test their courage and friendship.

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Sprache:Englisch
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भूत की कहानीMenu बंगला नंबर 17 (bungalow number 17)- horror kahaniya hindi 1 May 2025 by Neeraj Chaturvedi बंगला नंबर 17 (bungalow number 17)- (भूतिया घर) horror kahaniya hindi: 4/5 - (149 votes) Table of Contents बंगला नंबर 17 (bungalow number 17)- (भूतिया घर) horror kahaniya hindi: Click for फाइल नंबर 178 – Ghost hindi kahaniya Click for (नशा मुक्ति केन्द्र) – जबरदस्त मोटिवेशनल कहानी Click for मेरी बहू (Meri bahu)- horror story in hindi written बंगला नंबर 17 (bungalow number 17)- (भूतिया घर) horror kahaniya hindi: Bungalow number 17– ये कहानी तीन दोस्तों की है। जिनका नाम विक्रम, सुनील और जॉन होता है। जो बम्बई शहर में नौकरी करने के लिए आते हैं। तीनों बचपन के दोस्त, कुछ कर दिखाने का सपना लिए, इस भीड़ भाड़ वाली जगह में अपना मुक़ाम पाने के लिए दर दर भटकते हैं। उन्हें कोई भी रास्ता नज़र नहीं आता।अपने छोटे से गाँव में रह कर, कॉलेज की पढ़ाई करने वाले सुनील और बिक्रम ने कभी सोचा भी नहीं था, कि सफलता पाने के लिए इतना दर्द झेलना पड़ता है। वहीं, जॉन अपने पापा के बिज़नेस में पहले से ही संघर्ष कर चुका था। जिस वजह से उसे इन सब चीज़ों की आदत सी हो गई थी। जॉन अच्छे से जानता था, कि सफलता इतनी आसानी से नहीं मिलेगी, क्योंकि उसने अपने पापा को दिन रात मेहनत करते हुए देखा था। तभी तीनों को सुबह से भटकते भटकते शाम हो जाती है़। लेकिन न कोई नौकरी और न ही कोई रहने का ठिकाना उनके हाथ लगता। तीनों मायूस होकर 1 छोटे से होटल में खाना खाते हैं। दरअसल उनके पास कोई ख़ास पैसे भी नहीं होते। वह तो सिर्फ़ अपनी एक दो दिन की व्यवस्था बनाकर निकले थे, उन्हें लगा था, कि आते ही उनके साथ कोई चमत्कार होगा, और उनको नौकरी मिल जाएगी। तीनों एक बिल्डिंग के पास पहुँच जाते हैं| बंगला नंबर 17 (bungalow number 17)- (भूतिया घर) horror kahaniya hindi: Image by Pexels कुछ देर बाद सभी बिल्डिंग के गेट के पास बैठ जाते हैं। एक दो घंटा बैठे हुए गुज़र जाते हैं। तभी बिल्डिंग के चौकीदार की नज़र उन पर पड़ती है और वह ज़ोर की आवाज़ में उन्हें डांटते हुए कहता है, कौन हो तुम लोग, यहाँ क्यों बैठे हो ? तीनों अजनबी शहर में किसी को पहचानते नहीं, और न ही उनका कोई ठिकाना है। तीनों अपनी जगह पर जल्दी खड़े हो जाते हैं, और अपनी बात चौकीदार को बताते हैं। चौकीदार को तीनों की हालत देखकर उन पर तरस आता है। उसे एहसास होता है कि कुछ सालों पहले ऐसे ही वह काम माँगने आया था। तब किसी ने उसे सहारा दिया था, और आज कम से कम वह इतने बड़े शहर में छोटे से काम के साथ जीवन यापन कर पा रहा है। जॉन उन तीनों में थोड़ा समझदार होता है। वह चौकीदार से कहीं रहने के जुगाड़ की बात कहता है क्योंकि उसे पता है, कि अभी उनकी हालत किराया देने की नहीं है, तो उन्हें कोई किराया से कमरा क्यों देगा। तभी चौकीदार अपने एक दोस्त से फोन पर बात करता है, जो वही से कुछ ही दूर बंगला नंबर 17 में साफ़ सफ़ाई का काम करता है। चौकीदार अपने दोस्त को सारी बात बताता है। तभी उसका दोस्त कहता है कि मेरे साहब तो, अपने परिवार के साथ दो महीनों के लिए बाहर गए हैं। तब तक मैं रहने का इंतज़ाम कर सकता हूँ। यह बात सुनकर तीनों दोस्त बहुत ख़ुश हो जाते हैं, और वह जल्दी से चौकीदार से कहते हैं, कि आप हमें बता दीजिए हम उनके पास कैसे पहुँच सकते हैं ? चौकीदार कहता है, कि वह बंगला थोड़ा दूर है। रात को वहाँ कोई टैक्सी ऑटो भी नहीं मिलेगा। आज तुम लोग यही सो जाओ। कल सुबह हम साथ चलेंगे। तीनों उसकी बात मान जाते हैं। सुबह उठते ही तीनों चौकीदार के साथ बंगले में पहुँच जाते हैं। बंगले की ख़ूबसूरती देखकर तीनों दोस्त हक्का बक्का रह जाते हैं। उन्हें यक़ीन ही नहीं होता, कि उन्हें इतने अच्छे बंगले में रहने का मौक़ा मिलेगा। बंगले का नौकर तीनों दोस्तों को गेस्ट रूम में ले जाता है। तीनों दोस्त रूम में पहुंचकर राहत की साँस लेते हैं। जल्दी से तीनों नहा कर तैयार हो जाते हैं, और काम की तलाश में निकल जाते हैं। बंगला नंबर 17 (bunglow no 17)- (bhutiya ghar) darawani story in hindi: ghost kahani Image by Pexels अब रहने का तो ठिकाना लग चुका था। तलाश थी केवल अच्छे काम की। जिससे उनका गुज़ारा चल सके, लेकिन आज भी उनके साथ वही होता है। सुबह से शाम हो जाती है, लेकिन तीनों हताश होकर वापस अपने स्थान आ जाते हैं। नौकर तीनों के लिए खाने का इंतज़ाम करके रखता है। जिससे उन्हें बहुत ही राहत मिलती है। आज तीनों दोस्तों के लिए बंगले की पहली रात होती है। रात को 12 बजते ही अचानक बिक्रम की नींद खुल जाती है, और वह अपने आपको बंगले के तहख़ाने में पाता है। जहाँ पुराना सामान इकट्ठा करके रखा हुआ था। उसे समझ में नहीं आता, कि वह यहाँ कैसे पहुँचा तभी वह घबराहट में अपने दोस्तों को आवाज़ लगाता है, लेकिन किसी को कुछ सुनाई नहीं देता। तभी उसके कानों में सब कुछ सुनाई देना बंद हो जाता है, और सिर्फ़ एक औरत के रोने की आवाज़ जाती है। विक्रम चिल्लाकर पूछता है। कहाँ हो, तुम क्यों रो रही हो ? अगले ही पल बिक्रम अपने बिस्तर में होता है। वह डर के कारण पसीने से लथपथ हो जाता है, वह अपने दोस्तों को जगाता है। सुनील और जॉन दोनों उसकी बात का मज़ाक उड़ाते हैं, और कहते हैं तुमने कोई सपना देखा होगा। इस बंगले में तो हमारे अलावा कोई भी नहीं है, और विक्रम भी, अपने दोस्तों की बात का यक़ीन करके, इस घटना को बुरा सपना समझ कर नज़रअंदाज़ करके सो जाता है। सुबह उठते ही तीनों दोस्त फिर से तैयार होकर काम ढूंढने निकल पड़ते हैं, लेकिन जैसे ही वह बंगले के गेट से बाहर निकलते हैं। अचानक कोई औरत आकर बिक्रम को चिट्ठी देती है। जिसमें लिखा होता है, तुम इस पते पर जाओ तो, काम मिल जाएगा, और औरत अचानक भागते हुए उनकी नज़रों से ओझल हो जाती है। तीनों दोस्त की सोच में पड़ जाते हैं कि हमें काम की ज़रूरत है। यह इस औरत को कैसे पता। लेकिन तीनों को काम की बहुत ज़रूरत होती है। उ

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