A poor woodcutter's life is changed forever by a single act of honesty in this beautifully illustrated classic fable. When his axe falls into a magical river, a divine encounter tests his heart and brings a reward beyond his wildest dreams, teaching us all that truth is the greatest treasure.
एक समय की बात है। एक छोटे से गाँव में एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह रोज़ जंगल में जाकर लकड़ियाँ काटता और उन्हें बेचकर अपने परिवार का गुज़ारा करता था। एक दिन वह नदी के किनारे पेड़ काट रहा था। अचानक उसका हाथ फिसल गया और उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। लकड़हारा बहुत दुखी हो गया। वह नदी के किनारे बैठकर रोने लगा। उसने कहा, “अब मैं अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करूँगा?” तभी अचानक नदी से एक देवता प्रकट हुए। उन्होंने पूछा, “तुम क्यों रो रहे हो?” लकड़हारे ने सारी बात सच-सच बता दी। देवता नदी में गए और एक सोने की कुल्हाड़ी लेकर आए। उन्होंने पूछा, “क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?” लकड़हारे ने कहा, “नहीं, यह मेरी नहीं है।” फिर देवता नदी में गए और चाँदी की कुल्हाड़ी लेकर आए। उन्होंने फिर पूछा, “क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?” लकड़हारे ने फिर कहा, “नहीं, यह भी मेरी नहीं है।” आख़िर में देवता उसकी लोहे की पुरानी कुल्हाड़ी लेकर आए। लकड़हारा खुश होकर बोला, “हाँ, यही मेरी कुल्हाड़ी है।” लकड़हारे की ईमानदारी देखकर देवता बहुत खुश हुए। उन्होंने उसे सोने और चाँदी की कुल्हाड़ी भी इनाम में दे दी। लकड़हारा खुशी-खुशी अपने घर लौट आया। सीख: 👉 “ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।”